Tuesday, 8 September 2015

Smriti

स्मृति

प्र   १  भाई के बुलाने पर घर लौटते समय लेखक के मन में किस प्रकार का डर  था ?

उ  लेखक के भाई ने उन्हें बेर - झरी के पास जाने से मना किया था।   जब लेखक स्कूल से लौटते वक्त बेर - झरी से बेर तोड़ रहे थे , तब किसी ने उन्हें सुचना दी कि  उनके भाई उन्हें बुला रहे थे तो उनके मन में ये विचार आया कि  कहीं बेर खाने की गलती के लिए उन्हें मार या दन्त ना पड़े।

प्र    मक्खनपुर पढ़ने जाने वाले बच्चों की टोली रास्ते में पड़ने वाले कुएँ  में ढेला क्यों फेंकती थी ?

उ  मक्खनपुर पढ़ने जाने वाली बच्चों की टोली बहुत ही शरारती थी।  उन्हें मालुम था कि  कुँए  में साँप  था।  ढेला फेंकने पर साँप  को तकलीफ होती थी और वह कृध में फ़ुफ़कारने लगता था।  उसकी फुफकार सुनने के लिए ही बच्चे ऐसा करते थे।

 प्र   'सॉंप  ने फुफकार मारी या नहीं , ढेला उसे लगा या नहीं , यह बात अब तक स्मरण नहीं ' , यह कथन लेखक की किस मनोदशा को स्पष्ट करती है ?

ऊ  बाकी बच्चों की तरह लेखक भी एक बार सॉंप  पर ढेला फेंकने गया , पर दुर्भाग्यवश बहुत सी चिट्ठियाँ भी कुंए में जा गिरीं।  वह बहुत ही ज़रूरी चिट्ठियां थीं।  लेखक सांप की फुफकार सुनने के लिए आया था, लेकिन चिट्ठियों के कुंए में गिर जाने से उसके मन में भाई से पत्नी का दर कुंडली मार कर बैठ गया।  इसीलिए लेखक ने यह कथन किया। 

प्र   किन कारणों से लेखक ने कुंए से चिट्ठियों को निकालने का निर्णय लिया ?

उ  लेखक को चिट्ठियां उनके बड़े भाई ने दी थीं।  उन्हें डाकखाने में पहुंचाना बहुत ज़रूरी था।  अगर वह सच बोलते तो अवश्य मार पड़ती और यदि धुत बोलते तो उनका मन गलतियों का एहसास दिलाता रहता।  इसलिए उन्होंने चिट्ठियों को कुंए से निकालने का निर्णय लिया।

प्र   साँप  का ध्यान बंटाने के लिए लेखक ने क्या - क्या युक्तियाँ अपनाई ?

उ  साँप  का ध्यान बंटाने  के लिए लेखक ने डंडे का सहारा लिया. जब लेखक डंडे से चिट्ठियां चुनने की कोशिश कर रहा था तब साँप  का ध्यान डंडे की तरफ चला गया , उसने डंडे पर तीन - चार डंक भी मारे किन्तु अंत में लेखक चिट्ठियाँ समेटने में कामयाब रहे। 

Everyone's friend,

Seetha Lakshmi! :-)

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