मेरा छोटा सा निजी पुस्तकालय
प्र लेखक का ऑपरेशन करने से सर्जन क्यों हिचक रहे थे ?
उ लेखक को ज़बरदस्त दिल के दौरे पड़े थे। कुछ डॉक्टरों ने उन्हें मरा हुआ घोषित कर दिया था , डॉक्टर बोर्जेस ने उन्हें नौ सौ वॉल्ट्स के शॉक्स ,किन्तु इससे साठ प्रतिशत हार्ट सदा के लिए नष्ट हो गया। ओपन हार्ट सर्जरी के अलावा और कोई चारा नहीं था। इसी कारण सर्जन ऑपरेशन करने से हिचक रहे थे।
प्र 'किताबों वाले कमरे ' में रहने के पीछे लेखक के मन में क्या भावना थी ?
उ 'किताबों वाले कमरे' में रहने के पीछे लेखक के मन में यह भावना थी कि बचपन से लेकर तब तक के समय में जितनी भी किताबें उन्होंने संकलित की थीं , अपने को उनके साथ जुड़ा हुआ महसूस कर सकें। उन्हें अपनी किताबों से बहुत लगाव था।
प्र लेखक के घर में कौन - कौन सी पत्रिकाएँ आतीं थीं ?
उ लेखक के घर में आर्य - मित्र (साप्ताहिक) , वेदोदम , सरस्वती, गृहिणी और दो बाल पत्रिकाएँ - बाल सखा और चमचम नियमित रूप से आतीं थीं।
प्र लेखक को किताबें पढ़ने और सहेजने का शौक कैसे लगा ?
उ लेखक को बचपन से ही किताबें पहने का बहुत शौक था। वह खाना खाते समय भी किताबें पढता था। वह बालसखा और चमचम के अतिरिक्त सरस्वती और आर्यमित्र पढ़ने की कोशिश करता। उसे दयानंद सरस्वती के जीवनी की पुस्तक बहुत प्रिय थी। फिर पाँचवी कक्षा में प्रथम आने पर अंग्रेजी की दो किताबें ईनाम में मिलीं। तब से उनका पुस्तक संकलन शुरू हुआ।
प्र माँ लेखक की स्कूली पढ़ाई को लेकर चिंतित क्यों रहतीं थीं ?
उ लेखक सदैव स्कूली किताबों को छोड़कर बाकी किताबें पढता रहता , जबकि उनकी माँ को यह चिंता रहती थी कि वह साधु बनकर घर से भाग जाएगा। माँ का यह मानना था कि स्कूली पढ़ाई ही जीवन में उन्नति करने का मार्ग है। माँ की चिंता दूर करने के लिए लेखक ने स्कूली किताबें पढ़ीं और कक्षा में अच्छे अंक भी प्राप्त किए।
प्र 'इन कृतियों के बीच अपने को कितना भरा - भरा महसूस करता हूँ ' का आशय स्पष्ट कीजिए।
उ कई वर्षों बाद जब लेखक अपने पुस्तक संकलन पर नज़र डालते हैं तो उन्हें पता चलता है कि उन्होंने हिंदी एवं अंग्रेजी के उपन्यास, नाटक , जीवनियाँ , इतिहास, कला, पुरातत्व , राजनीति इत्यादि की कितनी ही किताबें संकलित की हैं। अंग्रेजी में रेनर मारिया, स्टीफन, ज्वीग , मोपांसा , चेरवत , टालस्टाय आदि तथा हिंदी में कबीर, तुलसीदास, सूरदास , प्रेमचंद , निराला, महादेवी वर्मा और अन्य लेखकों एवं चिंतकों आदि की कृतियों के साथ अपना जीवन व्यतीत किया। इन किताबों के बीच वे स्वयं को कभी अकेला नहीं महसूस करते थे। उन्हें किताबों से बहुत प्यार था।
Everyone's Friend,
Seetha Lakshmi! :-)
प्र लेखक का ऑपरेशन करने से सर्जन क्यों हिचक रहे थे ?
उ लेखक को ज़बरदस्त दिल के दौरे पड़े थे। कुछ डॉक्टरों ने उन्हें मरा हुआ घोषित कर दिया था , डॉक्टर बोर्जेस ने उन्हें नौ सौ वॉल्ट्स के शॉक्स ,किन्तु इससे साठ प्रतिशत हार्ट सदा के लिए नष्ट हो गया। ओपन हार्ट सर्जरी के अलावा और कोई चारा नहीं था। इसी कारण सर्जन ऑपरेशन करने से हिचक रहे थे।
प्र 'किताबों वाले कमरे ' में रहने के पीछे लेखक के मन में क्या भावना थी ?
उ 'किताबों वाले कमरे' में रहने के पीछे लेखक के मन में यह भावना थी कि बचपन से लेकर तब तक के समय में जितनी भी किताबें उन्होंने संकलित की थीं , अपने को उनके साथ जुड़ा हुआ महसूस कर सकें। उन्हें अपनी किताबों से बहुत लगाव था।
प्र लेखक के घर में कौन - कौन सी पत्रिकाएँ आतीं थीं ?
उ लेखक के घर में आर्य - मित्र (साप्ताहिक) , वेदोदम , सरस्वती, गृहिणी और दो बाल पत्रिकाएँ - बाल सखा और चमचम नियमित रूप से आतीं थीं।
प्र लेखक को किताबें पढ़ने और सहेजने का शौक कैसे लगा ?
उ लेखक को बचपन से ही किताबें पहने का बहुत शौक था। वह खाना खाते समय भी किताबें पढता था। वह बालसखा और चमचम के अतिरिक्त सरस्वती और आर्यमित्र पढ़ने की कोशिश करता। उसे दयानंद सरस्वती के जीवनी की पुस्तक बहुत प्रिय थी। फिर पाँचवी कक्षा में प्रथम आने पर अंग्रेजी की दो किताबें ईनाम में मिलीं। तब से उनका पुस्तक संकलन शुरू हुआ।
प्र माँ लेखक की स्कूली पढ़ाई को लेकर चिंतित क्यों रहतीं थीं ?
उ लेखक सदैव स्कूली किताबों को छोड़कर बाकी किताबें पढता रहता , जबकि उनकी माँ को यह चिंता रहती थी कि वह साधु बनकर घर से भाग जाएगा। माँ का यह मानना था कि स्कूली पढ़ाई ही जीवन में उन्नति करने का मार्ग है। माँ की चिंता दूर करने के लिए लेखक ने स्कूली किताबें पढ़ीं और कक्षा में अच्छे अंक भी प्राप्त किए।
प्र 'इन कृतियों के बीच अपने को कितना भरा - भरा महसूस करता हूँ ' का आशय स्पष्ट कीजिए।
उ कई वर्षों बाद जब लेखक अपने पुस्तक संकलन पर नज़र डालते हैं तो उन्हें पता चलता है कि उन्होंने हिंदी एवं अंग्रेजी के उपन्यास, नाटक , जीवनियाँ , इतिहास, कला, पुरातत्व , राजनीति इत्यादि की कितनी ही किताबें संकलित की हैं। अंग्रेजी में रेनर मारिया, स्टीफन, ज्वीग , मोपांसा , चेरवत , टालस्टाय आदि तथा हिंदी में कबीर, तुलसीदास, सूरदास , प्रेमचंद , निराला, महादेवी वर्मा और अन्य लेखकों एवं चिंतकों आदि की कृतियों के साथ अपना जीवन व्यतीत किया। इन किताबों के बीच वे स्वयं को कभी अकेला नहीं महसूस करते थे। उन्हें किताबों से बहुत प्यार था।
Everyone's Friend,
Seetha Lakshmi! :-)
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