क। निन्मलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
प्र प्रेम का धागा टूटने पर पहले की भांति क्यों नहीं हो पाता ?
उ प्रेम विशवास से जन्म लेता है, किन्तु , यदि यह विशवास ही टूट जाए, तो वह पहले की तरह नहीं रहता। मन खट्टा हो जाता है। जिस प्रकार धागा एक बार टूट जाए और उसे जोड़ने की चेष्टा की जाए तो उसमे गाँठ पड़ जाती है। इसी तरह प्रेम का धागा टूटने पर, मतलब, विशवास टूटने पर जुड़ना मुश्किल है, मन में यह डर बैठ जाता है कि यदि सम्बन्ध जुड़ भी जाएं तो पता नहीं फिर कब टूटेगा।
प्र हमें अपना दुःख दूसरों पर क्यों नहीं प्रकट करना चाहिए ? अपने मन की व्यथा दूसरों से कहने पर उनका व्यवहार कैसा हो जाता है ?
उ हमें अपना दुःख दूसरों पर प्रकट नहीं करना चाहिए क्योंकि संसार दूसरों का दुःख कभी नहीं समझता, उसे सिर्फ मज़ाक उड़ाना आता है, जले पर नमक छिड़कना आता है।
प्र रहीम ने सागर की अपेक्षा पंक जल को धन्य क्यों कहा है ?
उ रहीम ने ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि समुद्र का पानी खारा होता है , जो किसी की भी प्यास नहीं बुझा सकता लेकिन पंक जल इसलिए धन्य है क्योंकि वह सभी जीव , छोटे या बड़े सबकी प्यास बुझाता है।
प्र एक को साधने से सब कैसे साध जाता है ?
उ पौधे या पेड़ के जड़ को सींचने से उसमे फल, फूल आदि लगतें हैं , किन्तु यदि हम केवल टहनी या पत्ते पर ध्यान दें तो कुछ नहीं होता , उसी प्रकार यदि जीवन के सारे लक्ष्यों को पाना है तो ईश्वर की ही साधना से ही सब संभव है।
प्र जलहीन कमल की रक्षा सूर्य भी क्यों नहीं कर पाता ?
उ कमल के खिलने में सूर्य का बहुत बड़ा योगदान है, किन्तु जल के अभाव में कमल नष्ट हो जाता है क्योंकि जितना सूर्य की किरणें आवश्यक है उसी प्रकार जल भी कमल को सींचता है। मनुष्य के पास आत्मविश्वास का होना बेहद ज़रूरी है. चाहे संसार कितनी भी सहायता कर ले यदि मनुष्य को स्वयं में विशवास न हो तो कोई कुछ नहीं कर सकता।
प्र अवध नरेश को चित्रकूट क्यों जाना पड़ा ?
उ अवध नरेश, श्री रामचन्द्र को अपने पिता को दिए वचन के अनुसार वन में रहना पड़ा। वह कुछ समय तक चित्रकूट नामक सुन्दर स्थल में रुके थे। रहीम यह कहना चाहते हैं कि मुसीबत के समय मनुष्य को ईश्वर का ध्यान करना चाहिए।
प्र नट , किस कला में सिद्ध होने के कारण ऊपर चढ़ जाता है ?
उ एक बाज़ीगर या नट अपनी क्षमता के कारण बहुत ही काम स्थान पर अद्भुत कलाबाजियां दिखाता है, उसी तरह एक कुशल कवि कुछ ही छंदों में, अपने दोहों के माध्यम से बड़ी गूढ़ बात कह जाता है।
प्र मोती, मानस, चुन के सन्दर्भ में पानी के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
उ यह दोहा पानी के महत्त्व को समझाता है. संसार में कोई भी जीव पानी के बिना नहीं रह सकता। पानी हो तो हरियाली ही हरियाली है और उसके अभाव में सब व्यर्थ है। इसी तरह सम्मान का होना उतना ही आवश्यक है। यदि सम्मान न हो तो धन - दौलत, पद सभी व्यर्थ हैं।
Everyone's friend,
Seetha Lakshmi! :-)
प्र प्रेम का धागा टूटने पर पहले की भांति क्यों नहीं हो पाता ?
उ प्रेम विशवास से जन्म लेता है, किन्तु , यदि यह विशवास ही टूट जाए, तो वह पहले की तरह नहीं रहता। मन खट्टा हो जाता है। जिस प्रकार धागा एक बार टूट जाए और उसे जोड़ने की चेष्टा की जाए तो उसमे गाँठ पड़ जाती है। इसी तरह प्रेम का धागा टूटने पर, मतलब, विशवास टूटने पर जुड़ना मुश्किल है, मन में यह डर बैठ जाता है कि यदि सम्बन्ध जुड़ भी जाएं तो पता नहीं फिर कब टूटेगा।
प्र हमें अपना दुःख दूसरों पर क्यों नहीं प्रकट करना चाहिए ? अपने मन की व्यथा दूसरों से कहने पर उनका व्यवहार कैसा हो जाता है ?
उ हमें अपना दुःख दूसरों पर प्रकट नहीं करना चाहिए क्योंकि संसार दूसरों का दुःख कभी नहीं समझता, उसे सिर्फ मज़ाक उड़ाना आता है, जले पर नमक छिड़कना आता है।
प्र रहीम ने सागर की अपेक्षा पंक जल को धन्य क्यों कहा है ?
उ रहीम ने ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि समुद्र का पानी खारा होता है , जो किसी की भी प्यास नहीं बुझा सकता लेकिन पंक जल इसलिए धन्य है क्योंकि वह सभी जीव , छोटे या बड़े सबकी प्यास बुझाता है।
प्र एक को साधने से सब कैसे साध जाता है ?
उ पौधे या पेड़ के जड़ को सींचने से उसमे फल, फूल आदि लगतें हैं , किन्तु यदि हम केवल टहनी या पत्ते पर ध्यान दें तो कुछ नहीं होता , उसी प्रकार यदि जीवन के सारे लक्ष्यों को पाना है तो ईश्वर की ही साधना से ही सब संभव है।
प्र जलहीन कमल की रक्षा सूर्य भी क्यों नहीं कर पाता ?
उ कमल के खिलने में सूर्य का बहुत बड़ा योगदान है, किन्तु जल के अभाव में कमल नष्ट हो जाता है क्योंकि जितना सूर्य की किरणें आवश्यक है उसी प्रकार जल भी कमल को सींचता है। मनुष्य के पास आत्मविश्वास का होना बेहद ज़रूरी है. चाहे संसार कितनी भी सहायता कर ले यदि मनुष्य को स्वयं में विशवास न हो तो कोई कुछ नहीं कर सकता।
प्र अवध नरेश को चित्रकूट क्यों जाना पड़ा ?
उ अवध नरेश, श्री रामचन्द्र को अपने पिता को दिए वचन के अनुसार वन में रहना पड़ा। वह कुछ समय तक चित्रकूट नामक सुन्दर स्थल में रुके थे। रहीम यह कहना चाहते हैं कि मुसीबत के समय मनुष्य को ईश्वर का ध्यान करना चाहिए।
प्र नट , किस कला में सिद्ध होने के कारण ऊपर चढ़ जाता है ?
उ एक बाज़ीगर या नट अपनी क्षमता के कारण बहुत ही काम स्थान पर अद्भुत कलाबाजियां दिखाता है, उसी तरह एक कुशल कवि कुछ ही छंदों में, अपने दोहों के माध्यम से बड़ी गूढ़ बात कह जाता है।
प्र मोती, मानस, चुन के सन्दर्भ में पानी के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
उ यह दोहा पानी के महत्त्व को समझाता है. संसार में कोई भी जीव पानी के बिना नहीं रह सकता। पानी हो तो हरियाली ही हरियाली है और उसके अभाव में सब व्यर्थ है। इसी तरह सम्मान का होना उतना ही आवश्यक है। यदि सम्मान न हो तो धन - दौलत, पद सभी व्यर्थ हैं।
Everyone's friend,
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