Monday, 14 September 2015

Everest Meri Shikhar Yatra! :-)

एवरेस्ट मेरी शिखर - यात्रा

प्र   अग्रिम दल का नेतृत्व कौन कर रहा था ?

उ  एवरेस्ट अभियान दल ७ मार्च को दिल्ली से काठमांडू हवाई जहाज़ से चल दिया।  एक मज़बूत अग्रिम दल पहले ही चला गया था जिससे वह दुर्गम हिमपथ के रास्ते को साफ़ कर सके।

प्र   लेखिका को सागरमाथा नाम क्यों अच्छा लगा ?

उ  सूर्य सागर की जल को सोखकर बादलों में परिवर्तित कर देता है और वही बादल पर्वतों पर बर्फ तथा मैदानों में वर्षा बनकर पहुँच जाते हैं।  सागर के जल की इस यात्रा की यदि एक शरीर के रूप में किया जाए तो एवरेस्ट उस शरीर का मस्तक या सागरमाथा है।  ऐसी कल्पना के कारण ही लेखिका को सागरमाथा नाम अच्छा लगा।

प्र   लेखिका को ध्वज कैसा लगा ?

उ  एवेरेस्ट की तरफ देखते हुए लेखिका ने भारी बर्फ का बड़ा सा 'प्लूम ' देखा था जो पर्वत शिखर पर लहराते एक ध्वज के समान  था।

प्र   हिमस्खलन से कितने लोगों की मृत्यु हुई और कितने लोग घायल हुए ?

उ  हिमस्खलन से सोलह शेरपाओं में एक की मृत्यु हो गई और चार घायल हुए।

प्र   मृत्यु के अवसाद दो देखकर कर्नल खुल्लर ने क्या कहा ?

उ  मृत्यु को देखकरकर्नल खुल्लर ने कहा कि  एवेरेस्ट यात्रा जैसे महान अभियान में मनुष्य को मृत्यु को सहज भाव से स्वीकार करना चाहिए।

प्र   रसोई सहायक की मृत्यु कैसे हो गई ?

उ  जलवायु अनुकूल न होने के कारण एक रसोई सहायक की मृत्यु हो गई।

प्र   कैंप  चार कहाँ  और कब लगाया गया ?

उ  कैंप चार ७९०० मीटर ऊँची साउथ कॉल नाम की जगह ओर २९ अप्रैल को लगाया गया था।

प्र   लेखिका ने शेरपा कुली को अपना परिचय कैसे दिया ?

उ  लेखिका ने शेर्पा कुली को अपना परिचय यह कर दिया कि  वे बिलकुल ही नौसिखिया हैं और एवेरेस्ट उनका पहला अभियान है।

प्र   लेखिका की सफलता परकर्नल खुल्लर ने उनकी बधाई कैसे की ?

उ  लेखिका की सफलता परकर्नल खुल्लर ने कहा , "मैं तुम्हारी इस अनूठी उपलब्धि के लिए तुम्हारे माता - पिता को बधाई देना चाहूँगा" . वे बोले कि , "देश को तुम पर गर्व है और अब तुम ऐसे संसार में वापस जाओगी जो तुम्हारे अपने पीछे छोड़े हुए संसार से विभिन्न है " .

प्र   नज़दीक से एवेरेस्ट को देखकर लेखिका को कैसे लगा ?

उ  नज़दीक से एवेरेस्ट को देखकर लेखिका बचेंद्री पाल को बहुत अद्भुत अनुभव  हुआ।

प्र   डी  मीनू मेहता ने क्या जानकारी दी ?

उ  डी  मीनू मेहता ने पर्वतारोहियों को यह जानकारी दी कि  सीढ़ियों  से अस्थायी पुलों का बनाना , लट्ठों  और रस्सियों का इस्तेमाल , बर्फ की आदि तिरछी दीवारों पर रस्सियों को बाँधना और हमारे अग्रिम दल के अभियांत्रिकी कार्यों के बारे में उन्हें विस्तृत जानकारी दी।

प्र   तेनज़िंग ने लेखिका की तारीफ़ में क्या कहा ?

उ  तेनज़िंग हँसे और लेखिका से कहा कि  एवेरेस्ट उनके लिए भी पहला अभियान है , लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि  शिखर पर पहुँचने से पहले उन्हें सात बार एवेरेस्ट पर जाना पड़ा था।  फिर अपना हाथ लेखिका के कंधे पर रखते हुए उन्होंने कहा कि  , "तुम एक पक्की पर्वतीय लड़की लगती हो।  तुम्हे तो शिखर पर पहली  ही प्रयास में पहुँच जाना चाहिए।  "

प्र   लेखिका को किनके साथ चढ़ाई करनी थी ?

उ  लेखिका की आरंभिक चढ़ाई जय और मीनू के साथ करना पड़ा और अंतिम चढ़ाई अंगदोरज़ी और लहाद्द  के साथ करना पड़ा।

प्र   लोपसांग ने तम्बू का रास्ता कैसे साफ़ किया ?

उ  लोपसांग अपनी स्विस छुरी की मदद से लेखिका के तम्बू का रास्ता साफ़ करने में सफ़ल  हो गया था।

प्र   साउथ कोल  कैंप पहुँचकर लेखिका ने अगले दिन अपनी महत्वपूर्ण चढ़ाई की तैयारी कैसे की ?

उ  साउथ कोल  कैंप पहुँचकर लेखिका ने अगले दिन की आरंभिक चढ़ाई की तैयारी शुरू कर दी , उन्होंने खाना , कुकिंग गैस तथा ऑक्सीजन सिलिंडर इकट्ठे किए।

प्र   उपनेता प्रेमचंद ने किन स्तिथियों से अवगत कराया ?

उ  उपनेता प्रेमचंद जो अग्रिम दल का नेतृत्व कर रहे थे , २६ मार्च को पैरीच लौट आए।  उन्होंने अभियान की पहली बड़ी बाधा खंबु  हिमपात की स्तिथि से सब को अवगत कराया।

प्र   हिमपात किस तरह का होता है ?

उ  हिमपात अपने आप बर्फ के खण्डों के अव्यवस्थित ढंग से गिरने को कहा जाता है।  सभी को बताया गया कि  ग्लेशियर के बहने से अक्सर बर्फ में हलचल हो जाती है और बड़े - बड़े चट्टान गिरने लगते हैं।  कभी - कभी अन्य कारणों से भी अचानक खतरनाक स्थिति धारण कर लेती है।

प्र   लेखिका ने तंबू  में गिरे बर्फ पिंड का वर्णन कैसे किया है ?

उ  लेखिका गहरी नींद में सोई हुई थीं कि  रात करीब १२:३० बजे एक ज़ोरदार धमाका हुआ।   एक लंबा बर्फ का पिंड लेखिका के ऊपर आ गिरा , बर्फ के इस विशालकाय पुंज एक्सप्रेस रेलगाड़ी की तेज़ी से गिरा।  उनके कैंप को तहस - नहस कर दिया।  वास्तव में हर एक व्यक्ति घायल हो गया पर यह आश्चर्य है कि  कोई मरा नहीं।

प्र   लेखिका को देखकर 'की' हक्का - बक्का क्यों रहा गया ?

उ  लेखिका को देखकर 'की' हक्का - बक्का इसलिए रह गया क्योंकि बर्फ उन पर गिरने के बाद भी उनकी मृत्यु नहीं हुई।  

प्र   एवेरेस्ट पर चढ़ने के लिए कुल कितने कैम्प बनाए गए ?

उ  एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए कुल ३ कैम्प बनाए गए।

प्र   चढ़ाई के समय एवरेस्ट की चोटी की स्थिति कैसी थी ?

उ  बर्फ जमी होने के कारण रास्ता सीधा और ढलाऊ था।   चट्टानें  सख्त एवं भुरभुरी थीं , जैसे शीशे की चादरें बिछीं हों।  बर्फ को काटने के लिए फावड़े का इस्तेमाल करना पड़ा।  हवा की गति बढ़ने के कारण बर्फ के कण चारों ओर  उड़ रहे थे जिससे आगे का कुछ भी दिखाई नहीं पड़ रहा था।  पर्वत की चोटी बहुत तंग थी इसलिए सिर्फ एक व्यक्ति ही वहां खड़ा हो सकता था।  ढलान में खड़ा रहना असुरक्षित था इसलिए पर्वतारोहियों ने फावड़े की मदद से बर्फ तोड़कर आगे जाने का रास्ता बनाया।

प्र   सम्मिलित अभियान में सहयोग एवं सहायता की भावना का परिचय लेखिका बचेंद्री पाल के किस कार्य से मिलता है ?

उ  यह जानते हुए भी कि  बाहर जाने पर अपनी जान को ख़तरा हो सकता है, फिर भी बचेंद्री बाकी पर्वतारोहियोंके लिए जूस और गरम चाय ले गईं  . दूसरों के द्वारा इसे एक जोखिमपूर्ण काम बताने पर उन्होंने यह उत्तर दिया कि  , "मैं भी औरों की तरह एक पर्वतारोही हूँ , इसलिए इस दल में आई हूँ।  शारीरिक रूप से मैं ठीक हूँ , इसलिए मुझे औरों की मदद करनी चाहिए। " इससे उनकी सहायता की भावना का परिचय मिलता है।

प्र   आशय स्पष्ट कीजिए :

१  एवेरेस्ट जैसे महान अभियान में खतरों और कभी - कभी मृत्यु को भी आदमी को सहज भाव से स्वीकार करना चाहिए। 

उ  कर्नल खुल्लर पर्वतारोहियों को सम्बोधित करते हुए ऐसा कह रहे थे।  उनका मानना था कि  एवेरेस्ट की शिखर यात्रा करना एक महान अभियान है।  कोई भी महान काम अड़चनों से भरा होता है और एवेरेस्ट तो सबसे ऊँचा  पर्वत है , जोखिम से भरा है।  मौसम खराब हो जाने के कारण काफी मुश्किलें आती हैं और कभी - कभी तो मौत से आमना - सामना हो जाता है।  ऐसे में किसी की मृत्यु को भी सहजता से स्वीकार करने में ही समझदारी है।

२  सीधे धरातल पर दरार पड़ने के विचार और इस दरार का गहरे - चौड़े हिम - विदर में बदल जाने का मात्र ख्याल ही बहुत डरावना था।  इससे भी ज़्यादा भयानक इस बात की जानकारी थी कि  हमारे सम्पूर्ण प्रयास के दौरान हिमपात लगभग एक दर्ज़न  आरोहियों और कुलियों को प्रतिदिन छूता रहेगा।

उ  जब ज़मीन  सीधी हो तो चलना आसान है , पर वही ज़मीन कई मीटर लंबे पर्वत का रूप धारण कर ले तो चढ़ते वक़्त  डर का होना स्वाभाविक है।  ऐसे में हिमपात हो और बर्फ की चट्टानें  गिरनी शुरू हों तो लोगों के होश उड़ जाते हैं।  कभी - कभी दरारों की वजह से बर्फ की बड़ी - बड़ी चट्टानों के तले  धँसकर लोग मर जाते हैं।  इसलिए हिमपात की खबर सुनकर लेखिका का भयभीत होना स्वाभाविक था।

३  बिना उठे ही मैंने अपने थैले से दुर्गा माँ का चित्र और हनुमान चालीसा निकाला।  मैंने इनको अपने साथ एक लाल कपडे में लपेटा , छोटी - सी पूजा अर्चना की और बर्फ में दबा दिया।  आनंद के इस क्षण में मुझे माता - पिता के बारे में याद आया।

लेखिका 'बचेंद्री पाल' एवेरेस्ट की शिखर पर पहुँचने वाली प्रथम भारतीय महिला थीं।  उन्होंने मुश्किलों व् अड़चनों का सामना बहुत हिम्मत से की और अंत में अपने मंज़िल तक पहुँचने में सफल रहीं।  शिखर की शंखनुमा चोटी पर एक साथ दो लोगों का खड़ा होना मुश्किल था , इसलिए बर्फ के फावड़े से अपने लिए थोड़ा स्थान बना लिया।  घुटनों के बल बैठकर उन्होंने 'सागरमाथा' के ताज़  को चूम लिया।  उन्होंने लाल कपडे में दुर्गा माँ का चित्र और हनुमान चालीसा लपेटा, बर्फ में उसे दबाया , फिर अपने माता - पिता को याद करने लगीं क्योंकि यह उनके जीवन का अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण था।  इसलिए उन्होंने अपने माता - पिता एवं भगवान का स्मरण किया।

Seetha Lakshmi! :-)

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