Friday, 11 September 2015

Kallu kumhaar kI unaakoti! :-)

कल्लू कुम्हार की उनाकोटी

प्र   उनाकोटी का क्या अर्थ है ?

उ  उनाकोटी का अर्थ है , एक करोड़ से एक कम। त्रिपुरा राज्य के उत्तरी ज़िले में उनाकोटी नामक स्थान है जहाँ भगवान शिव की एक कोटि से एक कम मूर्तियां हैं , जो पहाड़ी को काटकर बनाई गई है।  इन मूर्तियों का निर्माता , वहां बसे आदिवासियों के अनुसार कल्लू कुम्हार था। 

प्र   पाठ के सन्दर्भ में उनाकोटी में स्तिथ गंगावतरण की कथा को अपने शब्दों में लिखिए।

उ  उनाकोटी में पहाड़ी को अंदर से काटकर विशाल आन बनाई गई हैं।  एक चट्टान भागीरथ की तपस्या पर प्रसन्न होकर स्वर्ग से पृथ्वी पर गंगा के अवतरण की कथा चित्रित है।  गंगा के वेग को पृथ्वी संभाल नहीं पाएगी इसलिए शिवजी ने उसे अपनी जटाओं से एक पतली धार के रूप में पृथ्वी पर धीरे - धीरे बहने दिया जिसका उल्लेख दूसरी चट्टान में बना हुआ है।  उस चट्टान पर पूरी शिवजी के चेहरे की खुदाई की गई है और उनकी जटाएँ पहाड़ों की चोटियों पर फैली है। 

प्र   कल्लू कुम्हार का नाम उनाकोटी से किस प्रकार जुड़ गया ?

उ  उनाकोटी -देवी  देवताओं की मूर्तियों से भरा पड़ा है।  किसी को यह नहीं मालूम कि  इन मूर्तियों को किसने बनाया , किन्तु वहाँ के निवासियों का मानना है कि कल्लू कुम्हार ही इन मूर्तियों का निर्माता था। वह देवी पार्वती का भक्त था।  वह कैलाश जाना चाहता था।  देवी पार्वती ने कहा की अगर वह एक रात में एक करोड़ मूर्तियां बना ले तो वह कैलाश जा सकता है।  उसने भी पूरी रात मूर्तियां बनाने में बिताई , पर जब सुबह हुई तो मूर्तियों की संख्या एक कोटि से एक कम थीं।  इस कारण वह कैलाश नहीं जा सका और उसका नाम सदैव के लिए उनाकोटी से जुड़ गया।

प्र   'मेरी रीढ़ में एक झुरझुरी सी दौड़ गई ' - लेखक के इस कथन के पीछे कौन सी घटना जुडी है ?

उ  लेखक अपने काम के सिलसिले में त्रिपुरा के हिंसाग्रस्त भागों में गए थे वहां पहुँचने के लिए उन्हें 'सी।  आर. पी . एफ ' के सुरक्षा घेरे में जाना था. वह बहुत धीमा चलता था. उन्होंने मुख्य सचिव से निवेदन किया कि  उन्हें काफ़िले  से आगे चलने की अनुमति मिले।  उन्हें तब तक डर  का एहसास नहीं था, पर जब किसी ने यह कहा कि  'दो दिन पहले हमारा यहीं विद्रोहियों द्वारा मारा गया था' तब उनकी रीढ़ में झुरझुरी सी दौड़ गई।  शेष यात्रा तक यही विचार उठता रहा की अगर सी आर पी  एफ  का सुरक्षा घेरा न हो तो विद्रोही कभी भी आक्रमण कर सकते हैं।

प्र   त्रिपुरा 'बहुधार्मिक समाज' का उदाहरण कैसे बना ?

उ  त्रिपुरा उन्नीस अनुसूचित जनजातियोंऔर विश्व के चारों बड़े धर्मों का प्रतिनिधित्व मौजूद है।  अगरतला के बाहरी हिस्से में पैचारथल में एक सुन्दर बौद्ध मंदिर है।  त्रिपुरा उन्नीस कबीलों में से दो, यानि  चकमा और मुघ महायानी बौद्ध हैं. ये कबीले बर्मा या म्यानमार से चटगाँव  के रास्ते आए थे।  दरअसल इस मंदिर की मुख्य बुद्ध प्रतिमा भी १९३० के दशक रंगून से लाइ गई थी। 

प्र   टीलियामुरा  कस्बे में लेखक का परिचय किन दो प्रमुख हस्तियों से हुआ ? समाज - कल्याण के कार्यों में उनका क्या योगदान था ?

उ  टीलियामुरा  एक बहुत बड़ा गाँव है।   वहां लेखक की मुलाक़ात प्रसिद्ध  लोकगायक हेमंत कुमार से हुई, जो १९९६ में संगीत - नाटक अकादमी द्वारा पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं।  वे कोकबारोक बोली में गाते हैं।  फिर उनकी मुलाक़ात एक और गायिका मंजू ऋषिदास से हुई।  मंजू जूते बनाने वाले मोचियों के समुदाय से हैं , यह समुदाय थापवाले वाद्य जैसे तबला और ढोल का निर्माण और मरम्मत करता है।  मंजू , रेडिओ कलाकार होने के अलावा नगर पंचायत की प्रतिनिधि थीं।  वे निरक्षर थीं, किन्तु पेयजल के बारे पूरी जानकारी रखतीं  थीं  . वे अपने वार्ड में नल का पानी पहुंचाने और मुख्य गलियों में ईंटें बिछवाने के काम कर रहीं थीं।

प्र   कैलासशहर  के जिलाधिकारी ने आलू की खेती के विषय में क्या जानकारी दी ?
उ  कैलासशहर के जिलाधिकारी ने आलू की खेती के विषय में निम्नलिखित जानकारी दी :

क  आलू बोने के लिए पारम्परिक रूप से दो मीट्रिक टन  प्रति हेक्टयर  की ज़रूरत होती है, जबकि टी पी  एस  की सिर्फ सौ ग्राम मात्रा दो हेक्टयर  के लिए काफी होती है।  त्रिपुरा की टी पी  एस का निर्यात न केवल असम , मिजोरम , नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश को बल्कि बांग्लादेश, मलेशिया और वियतनाम को भी किया जा रहा है। 

प्र   त्रिपुरा के घरेलु उद्योगों पर प्रकाश डालते हुए अपनी जानकारी के कुछ अन्य घरेलु उद्योगों के विषय में बताइए।

उ  त्रिपुरा में आलू के खेती के साथ - साथ अगरबत्तियों के लिए बांस की पतली सी केन तैयार की जाती है।  फिर इन्हें कर्नाटक और गुजरात भेजा जाता है।  अन्य घरेलु उद्योगों में माचिस , साबुन , प्लास्टिक , स्टील आदि के घरेलु उद्योग प्रसिद्द हैं।

सर्वम्  श्री कृष्णार्पणम्।

Seetha Lakshmi! :-)

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