एक फूल की चाह
प्र १ बीमार बच्ची ने क्या इच्छा प्रकट की ?
प्र १ बीमार बच्ची ने क्या इच्छा प्रकट की ?
उ सुखिया एक छोटी बच्ची थी, जो महामारी के चपेट में आ गई। उसका तन ज्वर से तप रहा था। ज्वर के अधिक होने पर वह बेहोश हो गई. अपने कमज़ोरी में उसने मंदिर में देवी के चरणों से एक फूल पाने की इच्छा प्रकट की। यह उसकी अंतिम इच्छा थी।
प्र २ सुखिया के पिता पर कौन सा आरोप लगाकर उसे दण्डित किया गया ?
उ सुखिया का पिता अछूत वर्ग का माना जाता था। उसका मंदिर में प्रवेश वर्जित था। उस समय में अछूतों के साथ बहुत बुरा व्यवहार किया जाता था। वह अपनी बेटी को ठीक करना चाहता था। उसका यह दृढ़ विशवास था था कि देवी माँ के चरणों का प्रसाद पाकर सुखिया ठीक हो जाएगी। वह मंदिर में प्रवेश करने और फूल लेने में भी सफल रहा किन्तु कुछ कट्टर लोगों ने उसे देख लिया और उसके मंदिर में प्रवेश करने और मंदिर की पवित्रता को नष्ट करने के आरोप में उसे सात दिन कारावास का दंड दिया।
प्र ३ जेल से छूटने के बाद सुखिया के पिता ने अपनी बच्ची को किस रूप में पाया ?
उ जेल से छूटने के बाद वह दौड़ा - दौड़ा अपनी बच्ची का हाल जानने घर गया, किन्तु सुखिया वहाँ नहीं थी। लोगों ने उसे बताया कि वह मर चुकी है। जब वह श्मशान अपनी बच्ची को अंतिम बार देखने गया तो उसे पता चला के उसके सेज - सम्बन्धी उसका दाह - संस्कार कर चुके हैं। उसकी लाड़ली सुखिया राख के ढेर में बदल चुकी थी।
प्र ४ इस कविता का केन्द्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।
उ यह कविता जात -पात एवं छुआछूत की समस्या पर प्रकाश डालती है। अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर होने पर भी एक अछूत कन्या की आखिरी इच्छा नकार दी जाती है। एक पिता अपनी बेटी की एक छोटी सी इच्छा भी अपने अछूत होने के कारण पूरा नहीं कर पाता, ऊपर से उसे कारावास में डाल दिया है। वह अपने बेटी के अंतिम दर्शन से भी वंचित रह जाता है। यह कविता यह दर्शाती है की कैसे लोग छुआछूत और जातिवाद फँस कर मानवता भूल जाते हैं।
सीता लक्ष्मी :-))
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